ट्रांसफार्मर (Transformer) हिंदी में

transformer image

नमस्कार दोस्तो मेरा नाम अमन है।आज मै आपको बताऊगा ट्रांसफार्मर के बारे में। तो आइए पड़ते हैं। ट्रांसफार्मर electrical engineering के अंदर आने वाले विषय electrical machines का एक हिस्सा है।ट्रांसफार्मर एक ऐसा यंत्र (device)है।जो करंट को कम या ज्यादा करके उसको किसी और बिजली से चलने वाले यंत्र(device)में भेजता है ।और फिर उसका उपयोग करता है।

ट्रांसफार्मर फराडे लॉ ऑफ इंडक्शन पर काम करता है।इसकी परिभाषा : ट्रांसफार्मर एक ऐसा स्थिर यंत्र है । जो एक सर्किट से दूसरे सर्किट तक बिजली पहुंचाने का काम करता है । और वो भी एक जैसे फ्रीक्वेंसी (frequency) पर।

उदहारण के लिए : आपके मोबाइल फोन का चार्जर।आप लोगो को पता ही होगा कि आपके घर में 220 वोल्ट की बिजली सप्लाई की जाती हैं। तो इसमें आपके मोबाईल फोन का चार्जर उस 220 वोल्ट को 5 वोल्ट में बदलकर चार्ज करता है। अगर आपके मोबाइल फोन के चार्जर में ट्रांसफार्मर का उपयोग नहीं होता तो आपका फोन जल या फट भी सकता था। electrical engineering में इस का बहुत उपयोग होता है।

ट्रांसफार्मर दो प्रकार के होते है 

  • स्टेप अप ( step up ) ⬆️
  • स्टेप डाउन ( step down )⬇️

1. स्टेप अप ( step up ): इस ट्रांसफार्मर में जब प्राइमरी वेडिंग ( primary winding ) में ज्यादा वोल्टेज होता है । और दूसरे तरफ जब ट्रांसफार्मर की मदद से इसको बदला जाता है । तो हमें सेकंडरी वेडिंग ( secondary winding )में प्राइमरी की जगह पर ज्यादा वोल्टेज मिलता है।उदहारण के लिए:  ( primary winding )  में हमने 220वोल्ट करंट दिया और स्टेप अप ट्रांसफार्मर के मदद से हमें बदले में उसका दो गुना करंट मिला।
2.स्टेप डाउन ( step down ): इस ट्रांसफार्मर में जब प्राइमरी वेडिंग में हमने करंट भेजा तो दूसरे तरफ ट्रांसफार्मर की मदद से हमें सेकंडरी वेडिंग में प्रिमारी के मुकाबले कम करंट देखने को मिलता है।उदहारण के लिए: ( primary winding )  में हमने 200वोल्ट करंट दिया । और स्टेप डाउन  ट्रांसफार्मर की मदद से हमें बदले में उससे 100 वोल्ट करंट मिला।
इन सब बातो को विस्तार से जानने के लिए आपको ट्रांसफार्मर की बनावट ( construction )पड़नी होगी। 

ट्रांसफार्मर की बनावट ( construction )

आप सब इस चित्र के माध्यम से यह देख सकते है कि एक ट्रांसफार्मर की बनावट कैसी होती है। यह किन- किन चीजों का बना होता है और उन चीजों का इसमें क्या उपयोग होता है।

ट्रांसफार्मर की बनावट

किसी भी ट्रांसफार्मर को बनाने के लिए उसमे कोर (core) का प्रयोग किया जाता हैं। कोर ट्रांसफार्मर का एक मह्त्वपूर्ण हिस्सा है। यह आयरन और सिलिकॉन की पतली -पतली पत्तियों वाली लैमिनेशन से मिलकर बना होता है। इस कोर को इस तरह से बनाए का मुख्य कारण यह है की इसकी मदद से ट्रांसफार्मर में कई प्रकार के नुकसान को कम किया जा सकता है। इस कोर में दो वेडिंग का भी प्रयोग किया जाता है जिसमें से एक होती है प्राइमरी वेडिंग और दूसरी सेकंडरी वेडिंग।

यह वेडिंग छोटे ट्रांसफार्मर में सॉलिड कॉपर वायर की बनी होती है वही दूसरी ओर बढ़े ट्रांसफार्मर में यह वायर, एल्युमिनियम और कॉपर की बनी होती है। जैसा कि आप चित्र में देख सकते है की प्राइमरी वेडिंग कोर के एक ओर बंधी होती है और सेकंडरी वेडिंग कोर के दूसरे ओर।प्राइमरी वेडिंग में हम करंट को देते है इसको (input) या (supply) भी कहतें है और दूसरी तरफ सेकंडरी वेडिंग में हमें करंट मिलता है जिसे हम  output  कहते हैं।

Working of ट्रांसफार्मर कैसे काम करता है।

ट्रांसफार्मर में प्राइमरी वेडिंग के जरिए करंट को कोर तक ट्रांसमिट करते है जो कोर पर स्प्रिंग या कायल के आकार की  बनी होती है। हालाकि प्राइमरी और सेकंडरी दोनों वेडिंग एक दूसरे से इलेक्ट्रिकली जुड़ी नहीं होती है।

जब प्राइमरी वेडिंग से करंट पास होता है तो फराडे लॉ ऑफ इंडक्शन के अनुसार कोर के अंदर EMF इलेक्ट्रो मोटिव फोर्स जेनरेट होता है जो कि पूरे कोर में घूमता रहता हैं इस फोर्स की वजह से कोर में मौजूद flux में बदलाव आता है जिसके कारण सेकंडरी वेडिंग में वोल्टेज बनाना शुरू हो जाता है। सेकंडरी वेडिंग में बने वोल्टेज को हम अपने काम के अनुसार इस्तमाल कर सकते है और सेकंडरी वेडिंग ही हमारा output होता है। 

Note : ध्यान देने वाली बात यह है कि जिस फ्रीक्वेंसी (frequency) पर हम करंट सप्लाई करते है उसे फ्रीक्वेंसी पर हमें हमारा आउटपुट या करंट मिलता है।उदहारण : हमने 100 वोल्ट करंट प्राइमरी वेडिंग में दिया 50 hz की frequency पर तो सेकंडरी वेडिंग पर हमें जो भी करंट मिलेगा वो भी 50 hz का ही मिलेगा। भारत में सभी जगह पर 50 hz पर बिजली पहुंचती है।

Parts of ट्रांसफार्मर के पार्ट्स

parts use in transformer
  • कोर
  • वेडिंगटैंक
  • ट्रांसफार्मर ऑयल
  • टर्मिनल एंड बुशिंग
  • कंजर्वेटर टैंक
  • बुछोलज रेले
  • ब्रीदर
  • एक्सप्लोसिव वाल्व
  • कूलिंग ट्यूब एंड रेडिएटर

अगले पोस्ट में आपको इन सभी पार्ट्स के काम और कुछ सवाल, जवाब भी मिलेंगे। हमारा ये पोस्ट पसंद आता है तो इसे अपने दोस्तो के साथ शेयर करना ना भूले।

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